Women Equality vs Women Empowerment

नमस्कार दोस्तों,


 Women Equality vs Women Empowerment महिला के लिए, स्वतंत्र रूप से कंधे से कंधा मिलाकर चलने की आजादी को दर्शाता है |


Women Equality vs Women Empowerment
 Women Equality vs Women Empowerment

 वूमेन क्वालिटी का तात्पर्य होता है की, किसी भी महिला को समानता के साथ पुरुष के समान कार्य करने एवं अपनी बात को समाज के आगे रखने का पूर्ण हक होता है |


महिला सशक्तिकरण का तात्पर्य यह होता है कि, महिलाओं में इतनी योग्यता आ जाती है कि, जिससे वह अपने जीवन से जुड़े हुए सभी बहुमूल्य निर्णय को स्वयं लेकर अपना मार्ग दर्शक बन जाती है |


महिलाओं का विकास होना बहुत जरूरी है क्योंकि, आज अधिकतर यह देखा जाता है कि, पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति सामान्य नहीं होती, वह महिलाएं अपने घर को संभालने में ही लगी रहती हैं, जिससे उन महिलाओं का सामाजिक रूप से विकास नहीं हो पाता और उनकी प्रतिभा निखर कर नहीं आ पाती |


इस कारण हमें चाहिए कि, उन महिलाओं को, महिलाओं के अधिकार के बारे में बता कर अवगत कराएं, ताकि वह अपने अंदर छुपी हुई प्रतिभा को बाहर निकाल कर, अपने आप को और अधिक सशक्त बना सके |


महिलाओं को समानता का अधिकार देना एवं उन को सशक्त बनाना बेहद जरूरी है, क्योंकि महिलाएं अगर कंधे से कंधा मिलाकर पुरुषों के साथ चलेंगी तो, सामाजिक रूप से अपना योगदान देकर, देश की उन्नति के लिए अपनी भागीदारी को निभा सकती हैं |


आज मैं अपने आर्टिकल के द्वारा, Women Equality vs Women Empowerment  के बारे में बता रहा हूं, यह जानकर प्रत्येक महिला अपने अंदर छुपी हुई प्रतिभा को बहुत ही आसानी से निखार सकती है, और समाज में रहकर उन सभी कार्यों में अपना योगदान दे सकती है जो उनके हक में होता है |


महिला समानता Women Equality :


Women Equality हर वर्ष 26 अगस्त को मनाया जाता है | महिला समानता समाज की एक सुंदर एवं सुरक्षित नीव होती है, जिस पर देश की एवं महिलाओं की विकास रूपी इमारत बनाई जा सकती है | 


समानता का तात्पर्य यह नहीं है कि, प्रत्येक व्यक्ति एक ही लिंग का हो, इसका सीधा तात्पर्य है, समाज में महिला एवं पुरुष को समान अधिकार के साथ रोजगार के अवसर दिया जा सके |


पुरुष एवं महिलाओं को समान अधिकार देना समाज का एक मूल आधार है, प्रत्येक महिला एवं पुरुष को उसके क्षमता एवं काबिलियत के अनुसार, रोजगार के अवसर समान रूप से देने चाहिए, और पुरुषों द्वारा सभी महिलाओं के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए |


महिलाएं बौद्धिक रूप से पुरुषों के समान होती हैं | लेकिन जगह जगह पर देखा जाता है कि, महिलाओं को पुरुषों से कम वेतन मिलता है, क्योंकि पुरुषों की यह सोच होती है कि, महिलाएं कमजोर एवं छोटी होती हैं,इस सोच को बदलने के लिए महिला समानता का यह संघर्ष अभी लंबे समय तक चलेगा, जिससे महिलाओं को पुरुषों के बराबरी का अधिकार संपूर्ण रूप से दिया जा सके |


Women Equality की बात तो हर कोई व्यक्ति करता है, लेकिन सोचने और समझने वाली बात यह है कि क्या महिलाओं को समानता का अधिकार मिलता है, इसका जवाब यह है कि, नहीं | क्योंकि अक्सर यह देखा जाता है कि, किसी भी दफ्तर में अगर कोई महिला पुरुष के बराबर पद पर काम कर रही है तो, उस महिला को पुरुष के बराबर वेतन नहीं मिलता |


उसी प्रकार किसी भी महिला को अपने अनुसार, कपड़े पहनने, पढ़ने-लिखने, घूमने फिरने की आजादी, भी पुरुष के समान नहीं होती, इसी प्रकार के बहुत से उदाहरण है कि, महिलाओं को पुरुष के बराबर समानता का अधिकार नहीं दिया जाता, इन्हीं सब बातों को देखकर महिलाओं को बराबरी का हक देने के लिए उनके सम्मान में, हर वर्ष 26 अगस्त को Women Equality के रूप में मनाया जाता है |


आज भी पुरानी परंपरा के अनुसार, अधिकतर यह देखा जाता है कि, बेटियों को पैदा होने से पहले ही कोक में खत्म कर दिया जाता है, ताकि वह बेटी पैदा होकर किसी भी मां बाप के ऊपर बोझ ना बन सके, लेकिन आज धीरे-धीरे ऐसी पुरानी मान्यताओं के खिलाफ सख्ती से कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि कोई व्यक्ति बेटियों के पैदा होली से पहले उसकी हत्या ना कर सके |


केवल महिलाओं के जागरूक होने से काम नहीं चल सकता क्योंकि, समाज पुरुष और महिला दोनों से मिलकर, एक अच्छे समाज की रचना होती है, इसीलिए प्रत्येक महिला को सामाजिक क्षेत्र में, आर्थिक क्षेत्र में,    राजनैतिक क्षेत्र में, विज्ञान के क्षेत्र में, मनोरंजन के क्षेत्र में, खेल के क्षेत्र में, आदि सभी क्षेत्रों में पुरुषों के बराबर सामान अधिकार देना बहुत जरूरी है, ताकि महिला भी अपने इन योगदानों से, देश एवं समाज की उन्नति में अपनी भागीदारी देकर उज्जवल बना सके |


महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) :


देश में महिलाओं को सशक्त होना बेहद जरूरी है | क्योंकि, महिला अगर सशक्त होगी तो, वह अपने जीवन से जुड़े हुए, अपने अधिकार के द्वारा, अपने निर्णय स्वयं ले सकती हैं, और अपने आप को सशक्त बना सकती है | महिला समाज के सभी बंधनों से मुक्त होकर अपने निर्णय स्वयं ले सकती है |


भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा कहा गया था कि, अगर लोगों को जगाना है तो महिलाओं का जागृत होना बहुत ही जरूरी है, क्योंकि अगर महिला एक बार अपना कदम बड़ा लेती है तो, उसके द्वारा बड़े कदमों से, उसके परिवार के साथ साथ उसके गांव का विकास शीघ्र होने लगता है |


महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए, सबसे पहले समाज में महिलाओं के अधिकारों की उपेक्षा करने वाले, दुर्जन का नाश करना बहुत जरूरी है, ताकि उस व्यक्ति की राक्षसी सोच को आसानी से खत्म किया जा सके, राक्षसी सोच का तात्पर्य यह है कि, जैसे अशिक्षा, यौन हिंसा, दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या, बलात्कार, वेश्यावृत्ति, मानव तस्करी, महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा, आदि के द्वारा महिलाओं का उत्पीड़न करना | 


इसलिए समाज में हर एक व्यक्ति का यह प्रथम कर्तव्य होता है, ऐसी बुराइयों को दूर करके महिलाओं को समाज में उचित स्थान देना चाहिए, जिससे वह अपने आप को और अधिक सशक्त बना सकें |


एक महिला मां बनती है तो, उससे हमारा आध्यात्मिक पक्ष मजबूत बन जाता है, बल्कि पुरुष का पिता बनने से भौतिक पक्ष मजबूत बनता है, जीवन की गाड़ी महिला और पुरुष के आपस के पारस्परिक संबंधों के द्वारा ही चलती है, प्रत्येक महिला को यह जरूरी है कि वह अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करें, और अपने आपको समाज में सशक्त रूप से निखारे |


किसी भी नारी के बिना पुरुष की परीकल्पना भी नहीं की जा सकती, भगवान ने नारी को सरल एवं सहजता के साथ कोमल बनाया है | Women Empowerment के लिए संयुक्त राष्ट्र के द्वारा, कई कार्यक्रमों का आयोजन दुनिया भर में, हर साल किया जाता है, जिससे नारी शक्ति की सही रूप में पहचान हो सके, इसके बावजूद बड़े दुख की बात है कि, आज भी हम महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार एवं पहचान देने के लिए, अधिक मेहनत करनी पड़ रही है |


Women Empowerment के लिए महिलाओं का सशक्त होना अति आवश्यक है, जिसके लिए हमें अनेकों प्रकार के कदम उठाना बेहद जरूरी है -


1.वुमन एंपावरमेंट के लिए महिलाओं द्वारा समाज का विकास होना अति आवश्यक है !


2. महिलाओं के ऊपर घरेलू हिंसा की रोकथाम किया जाना चाहिए !


3. प्रत्येक महिला को आत्म निर्भर बनना बहुत जरूरी है महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार देकर, कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहिए, जिससे महिला परिवार की आर्थिक कमजोरी को दूर कर सकें !


4. महिलाओं को शिक्षित होना बहुत जरूरी है, जिससे वह अपनी प्रतिभा को निखार कर समाज में अपना योगदान दे सकें !


इसी प्रकार के अनेक प्रकार के सशक्तिकरण कदम उठाकर वुमन एंपावरमेंट को बढ़ावा दिया जा सकता है |



Women Equality vs Women Empowerment निष्कर्ष :


उपरोक्त सभी पंक्तियों से यह निष्कर्ष निकलकर आता है कि, एक महिला के लिए Women Equality vs Women Empowerment के जरिए हर एक महिला को अपने अंदर की प्रतिभा को निखारने का मौका मिलना चाहिए, जिससे महिलाएं पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त कर देश को, और अधिक ऊंचाइयों के शिखर पर ले जा सके |


 इसलिए महिला और पुरुष के बीच, कभी भी लैंगिक भेदभाव नहीं रखना चाहिए, लैंगिक भेदभाव के चलते किसी भी महिला का सही मायने में विकास नहीं हो सकता, इसलिए सदैव महिला और पुरुष को समान अधिकारों के साथ कार्य करने की प्रतिभा पर बल देना चाहिए |








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