Parsi Dharm Nav Varsh | History | Significance | Dharm Granth

नमस्कार दोस्तों,


भारत देश विभिन्न प्रकार के जाति धर्मों के लोगों के रहने का केंद्र बिंदु है इसलिए सभी धर्मों के बीच पारसी धर्म के समुदाय के लोग भी भारत देश में विभिन्न राज्यों में रहते हैं


Parsi Dharm Nav Varsh | History | Significance | Dharm Granth
Parsi Dharm Nav Varsh | History | Significance | Dharm Granth


पारसी धर्म जंद अवेस्था नाम के धर्म पर आधारित है फारस के राज धर्म के रूप में पारसी धर्म को माना जाता है


आज मैं अपने इस आर्टिकल के द्वारा पारसी धर्म के लोगों का नव वर्ष कब और कैसे मनाया जाता है !

पारसी धर्म का इतिहास क्या है !

अगस्त महीने में क्यों मनाते हैं नवरोज़ (नया साल) !

पारसी धर्म का महत्व क्या है !

और पारसी धर्म के धर्म ग्रंथ की जानकारी दे रहा हूं जिसे जानकर आप को बहुत ही हर्ष होगा |


पारसी धर्म, नव वर्ष कब मनाया जाता है | इतिहास | महत्व | धर्म ग्रंथ क्या है ?


फारसी शब्द का अर्थ पार्सिस से आया हुआ व्यक्ति है |


पारसीपन की जानकारी धर्म के लिए नहीं बल्कि एक विशिष्ट पारसी व्यवहार, लोकोक्तियों, प्रहसन और हास्य से उत्पन्न होता है | 


पारसी धर्म के समुदाय की संख्या घट रही है, वह प्रमुखता कोलकाता पश्चिमी तट, (कलकाता) चेन्नई में रहते हैं | इसके विपरीत कहा जाए तो 19वीं सदी के मध्य में ईरान से भारत आए हुए पारसी, ( जरथूस्त्री ) का एक बढ़ता हुआ समूह है | 


पारसी अग्नि मंदिरों में, दोनों समूह पूजा करते हैं, और पारसी धर्म के रीति-रिवाजों का पालन करते हैं |


पारसी नववर्ष कब और कैसे मनाया जाता है :


हर वर्ष पारसी समुदाय के लोग अगस्त महीने की 16 तारीख को, पारसी न्यू ईयर के रूप में मनाते हैं |

पारसी धर्म के लोग पारसी न्यू ईयर को नवरोज भी कहते हैं  | 


इस दिन पारसी धर्म के लोग नव वर्ष को "अब्रूज" की तरह मनाते हैं | इस दिन नए वर्ष को मनाने के लिए विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि, नए साल में घर की साफ-सफाई, नए कपड़े पहनना, एक दूसरे को उपहार देना, और धर्म स्थलों पर जाकर दान करना, यह विशेष रुप से ध्यान दिया जाता है |


पारसी धर्म के लोग, 1 वर्ष में 360 दिन मानते हैं, और बचे हुए 5 दिन का मतलब, उनके लिए गुण-गान, गाथा के लिए होता है |


गुड़-गान, गाथा का तात्पर्य अपने पूर्वजों को याद करने का दिन होता है, वह हर साल साल के अंत के 5 दिन अपने, पहले के पूर्वजों को याद करते हैं, और उनकी पूजा करते हैं, पूजा करने का भी उनका एक खास अंदाज होता है, वह सुबह 3:30 बजे उठ कर, खास प्रकार की पूजा करते हैं |  


पारसी धर्म के लोग चांदी, तांबे या स्टील के बर्तन में फूल रखकर अपने पूर्वजों को याद किया करते हैं, पारसी धर्म में अग्नि की पूजा की जाती है, इसलिए पारसी धर्म के लोग अग्नि पूजा को विशेष महत्व देते हैं |


पारसी नव वर्ष का इतिहास :


प्राचीन ईरान में पैगंबर जरथूस्तर द्वारा, लगभग  3500 साल पहले पारसी धर्म की स्थापना की गई थी | 633 ईसवी में, अरब मुसलमानों का आक्रमण होने के कारण इराक को 651 ईसवी में, फिर ईरान को जीत लिया था | इस्लामिक सेनाओं ने भारत पर आक्रमण किया और इसी तरह देश में बस गए  |


पारसी शब्द फारसी के लिए गुजराती है, पारसी नववर्ष जो वर्ष के पहले दिन को चिन्हित करता है, पारसी समुदाय में व्यापक रूप से मनाया जाता है, इसलिए भारत में पारसी नववर्ष 200 दिन के बाद मनाया जाता है, क्योंकि शहंशाह कैलेंडर में लीप वर्ष का हिसाब नहीं होता है, इसलिए पाकिस्तान और भारत के पारसी लोग इस दिन को, "जमशेद ए न्यूरोज" के रूप में मानते हैं | 

जो आमतौर पर जुलाई-अगस्त में पड़ता है, त्योहार का नाम फारसी राजा जमशेद के नाम पर रखा गया था, जिन्होंने पारसी कैलेंडर की शुरुआत की थी |


पारसी नववर्ष का महत्व :


पारसी लोग घर को सजाने के लिए फूलों के द्वारा सुंदर रंगोली बनाते हैं, और आने वाले लोगों का स्वागत करते हैं, पारसी लोग हमेशा नव वर्ष की खुशियां मनाने के लिए, फूलों को और अग्नि की पूजा को विशेष तौर पर महत्व दिया जाता है | 


 वह अपनी रंगोलियां को प्रकृति की सुंदरता को दर्शाते हुए, चौक के द्वारा सुंदर-सुंदर रंगोलियां को बनाते हैं,

नववर्ष के दिन लोगों के आगमन पर पारसी लोग अक्सर गुलाब जल उन सभी आगंतुकों के ऊपर छलकते हैं, और पारसी धर्म के लोग नववर्ष पर खास रूप से बहुत ज्यादा दान दिया करते हैं |


पारसी धर्म के लोगों के यहां अक्सर नवरोज यानी न्यू ईयर वाले दिन लोगों का आना जाना एवं एक दूसरे को बधाई देने का सिलसिला चलता रहता है, इस कारण वह अपने पकवानों पर भी विशेष ध्यान देते हैं, जिससे उनके घर पर आए लोगों का मुंह को मीठा किया जा सके |


पारसी धर्म के लोग अपने घर में आने वाले मेहमानों को अधिकतर मीठे के रूप में फालूदा खिलाते हैं, और पारसी धर्म में हमेशा नए साल आने पर हमेशा पारंपरिक तरीकों से ही मनाते हैं |


पारसी समुदाय का धर्म ग्रंथ :


पारसियों का सबसे प्रमुख एवं पवित्र ग्रंथ "जेंद अवेस्ता" माना जाता है, यह ग्रंथ हिंदुओं के ऋग्वेद संस्कृत की ही पुरानी शाखा, "अवेस्ता" भाषा में लिखी गई है, ईरान के शासनकाल में "जेंद अवेस्ता" ग्रंथ का अनुवाद पहलवी भाषा में किया गया, जिसको आज हम "पजंद" कहते हैं, लेकिन इसका आज केवल पांचवा भाग ही मौजूद है,

इस पवित्र ग्रंथ को पांच भागों में बांटा गया है |


1. यज्ञ - संस्कार एवं अनुष्ठानों को करने के लिए

2. विशपराद - दुष्ट आत्माओं एवं गुरुजनों को दूर रखने के लिए

3. यष्ट - प्रार्थना पूजा करने के लिए

4. खोरदा अवेस्ता - नित्य प्रार्थना करने वाली पुस्तक

5. उमेश स्पेंटा - यज्जतो की प्रार्थना के लिए


निष्कर्ष :


उपरोक्त सभी पंक्तियों से यह निष्कर्ष निकलकर आता है कि, जिस प्रकार भारत देश में अनेकों प्रकार के धर्मों के द्वारा, अपने-अपने त्योहारों को मनाया जाता है, उसी प्रकार पारसी धर्म के लोग भी, नवरोज यानी पारसी न्यू ईयर, को बहुत ही धूमधाम एवं पावन तरीके से मनाते हैं | 

पारसी धर्म के लोग अपने  नए साल को बहुत ही पारंपरिक तरीकों एवं खुशियों के साथ हर्षोल्लास और सभी धर्मों के लोगों के साथ मिलकर मनाते हैं |

इसीलिए कहा जाता है -


भारत देश "अनेकता में एकता" का प्रतीक है !





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