ओणम का त्योहार कैसे मानते हैं Onam Festival Celebration

नमस्कार दोस्तों,


भारत देश को किसी न किसी धर्म-जाति या समाज के आधार पर, हर दिन एक विशेष त्योहार मनाए जाने का प्रतीक माना जाता है, इसीलिए भारत देश की संस्कृति  "विविधता में एकता" यानी "अनेकता में एकता" का संदेश देती है, इस कारण दक्षिण भारत में मनाए जाने वाला त्यौहार "ओणम" इस संदेश को दर्शाता है |


Onam Celebration, Kerala
 Onam Celebration, Kerala 

भारत देश में अनेक प्रकार के धर्म और उनसे जुड़ी अनेक प्रकार की संस्कृति या होती हैं, भारत में हर एक राज्य की अलग-अलग संस्कृति होती है, और संस्कृति से जुड़े अनेकों त्यौहार, को सभी लोग आपस में एक दूसरे के साथ मिलकर मनाते हैं, भारत में कुछ तोहार ऐसे भी हैं, जिन्हें पूरा देश मिलकर मनाता हैं, और देश में कुछ तोहार ऐसे भी हैं, जिनको केवल राज्य स्तर पर ही मनाया जाता है, राज्य स्तर पर मनाए जाने वाला तोहार "ओणम" उनमें से एक है |


भारत के दक्षिणी राज्य केरल में मनाए जाने वाला त्यौहार, ओणम बहुत ही प्रमुख त्यौहार होता है, इस त्यौहार को केरल में बहुत ही बड़े स्तर के साथ  धूमधाम और खुशियों के साथ मनाया जाता है, ओणम का त्योहार दशहरे की तरह 10 दिनों तक मनाया जाता है, पूरा केरल राज्य ओणम के त्यौहार के दिन बहुत ही खूबसूरत बहुत रंगीन नजर आता है |


आज मैं अपने इस आर्टिकल के द्वारा बता रहा हूं कि, ओणम Celebration केरल राज्य में कैसे किया जाता है |


Onam Celebration केरल राज्य में कैसे करते हैं :


ओणम का त्योहार भारत में मुख्य रूप से केरल में मनाया जाता है, ओणम के त्यौहार की सबसे प्रमुख विशेषता यह होती है कि, इस दिन मंदिरों में पूजा अर्चना नहीं की जाती, बल्कि सभी लोग घर में ही पूजा करते हैं |


प्राचीन परंपरा के अनुसार, Onam Celebration :


प्राचीन मान्यता के अनुसार, जब परशुराम जी ने पूरी पृथ्वी को जीतकर क्षत्रियों से विहीन कर,  पृथ्वी को ब्राह्मणों को दान कर दिया था, पूरी पृथ्वी को दान करने के बाद परशुराम जी को रहने के लिए कोई भी स्थान नहीं बचा, उसके बाद परशुराम जी ने एक पर्वत की गुफा में जाकर वरुण देवता की घोर तपस्या की | 


परशुराम जी की तपस्या से खुश होकर वरुण देवता ने उनको दर्शन देखा कहा कि, तुम अपना फरसा समुंद्र में फेंको, तुम्हारा फरसा समुद्र में जहां पर भी जाकर गिरेगा, वहां तक समुंद्र का पानी सूखकर, पृथ्वी बन जाएगा, वह सूखा हुआ भाग पृथ्वी के रूप में तुम्हारा हो जाएगा | 


जितना क्षेत्र परशुराम को पृथ्वी के रूप में मिला, उस क्षेत्र को आज हम केरल राज्य या मलयालम के नाम से जानते हैं | परशुराम जी ने उस क्षेत्र को पृथ्वी के रूप में पाकर, उस क्षेत्र में भगवान विष्णु जी का एक मंदिर बनवाया, उस मंदिर को आज "तिरुकक्कड़ अप्पण" के नाम से जाना जाता है, मंदिर में परशुराम जी ने जिस दिन मूर्ति स्थापना की थी, उस दिन श्रावण मास की शुक्ल त्रयोदशी का दिन था, तभी से ओणम के त्यौहार को मनाया जाता है |


फूल और रंगोली के द्वारा Onam Celebration :


ओणम के त्यौहार को मनाने के लिए केरल राज्य के लोग, 10 दिन पहले से ही इसकी तैयारियां शुरू कर देते हैं, और सभी लोग अपने घर आंगन को साफ सुथरा करके, घर के एक कमरे में गोल रंगोली बनाकर उसको फूलों द्वारा सजाया जाता है, इस तोहार को मनाने के लिए 8 दिन बराबर निरंतर फूलों से सजाते हैं, और नौवें दिन घर में भगवान विष्णु की मूर्ति बनाकर, उसकी पूजा की जाती है |


परिवार की सभी महिलाएं, गोल फूलों की रंगोली के चारों तरफ ताली बजाकर नाचती है, और बच्चे भगवान विष्णु के वामन अवतार के गीत गाते हैं, मूर्ति के सामने दीप जलाए जाते हैं, और अंत में पूजा अर्चना करके मूर्ति को विसर्जित किया जाता है |


स्वादिष्ट पकवानों द्वारा, Onam Celebration :


Onam को मनाने के लिए सभी लोग अपने घर में दो-तीन दिन पहले से ही स्वादिष्ट, पकवानों को बनाना शुरू कर देते हैं, Onam का यह त्यौहार बहुत ही हर्ष उल्लास और स्वादिष्ट पकवानों के साथ एक दूसरे को खिलाकर Celebrate किया जाता है, इस अनुपम त्यौहार में अनेकों प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं, इन व्यंजनों को खाने के लिए सभी लोग, अपने मित्र करीब के यार रिश्तेदार को इस आयोजन में बुलाते हैं, और स्वादिष्ट पकवान खिलाते हैं |


 इन पकवानों को "ओणम लंच" भी कहते हैं, इन पकवानों को बनाने के लिए लगभग 27 प्रकार के जैसे- केला, केला चिप्स, दूध-दही, आम दूध, चावल की खीर, सांभर, खिचड़ी, पापड़, बीटरूट, आदि दक्षिण भारतीय पकवान को शामिल किया जाता है, जिनको केले के पत्ते पर परोस कर, बहुत ही प्यार से खाया जाता है |


खेलकूद द्वारा, Onam Celebration :


10 दिन तक चलने वाले दक्षिण भारतीय केरल राज्य के इस त्यौहार में, अनेकों प्रकार के खेलों का आयोजन भी किया जाता है, इन खेलों में सबसे प्रमुख (नाव) नौका दौड़ होती है, सांप के आकार की नौका दौड़ में भाग लेने के लिए, लोगों का उत्साह देखने योग्य होता है, इस दौड़ के दौरान लोगों द्वारा, गीत एवं कोलाहल उत्साह के साथ भाग लेते हैं |


केरल में सन 1972 में ओणम उत्सव के कार्यक्रम में नौका स्पर्धा को जोड़ा गया था, इस नौका दौड़ को देखने के लिए हजारों दर्शक, "पंपा नदी" के तट पर आकर दौड़ का आनंद लेते हैं, नौका चालक अपने आप को "श्वेत मुड्डू एवं पगडंडि" से बांधकर  गीत गाते हुए, नौका को चलाते हैं, नोखा के आगे सुनहरी रंग की लाल झंडी एवं बीच में, छाते के आकार के ध्वज से, पूरी सर्प के आकार की नौका, सुशोभित होती है, जिसकी छटा देखकर चांदनी रात भी फीकी पड़ जाती है |


इस प्रकार का आनंद हर एक दृश्य को देखकर, सभी लोगों का मन झूमने एवं नाचने गाने लगता है, क्योंकि 

ओणम तोहार पर सांप के आकार की, नौका दौड़ का विशेष महत्व होता है |


Onam celebration  निष्कर्ष :


उपरोक्त सभी पंक्तियों से यह निष्कर्ष निकलकर आता है कि, Onam भारत के दक्षिण राज्य में मनाए जाने वाला एक मनोहारी तोहार होता है, जिसे सभी लोग बहुत ही एवं प्रेम के साथ मिलजुल कर, एक दूसरे को स्वादिष्ट पकवान खिलाकर, और अपने घर द्वार को साफ सुथरा करके, खूबसूरत फूलों के द्वारा, रंगोलीओं को  बना कर, भगवान विष्णु जी की मूर्ति स्थापित करके, पूरे 10 दिनों तक उत्साह पूर्वक Onam त्यौहार को Celebrate करते हैं |



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