मोहर्रम मनाना जायज है या नहीं | Good & Bad Things About Muharram

नमस्कार दोस्तों,


भारत देश विभिन्न प्रकार की जाति-धर्मों से निहित धर्म प्रधान देश है | भारत में सभी धर्मों के लोग अपने-अपने त्योहारों को बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं, लेकिन मुस्लिम समुदाय के लोगों का तोहार "मुहर्रम" अलग ही तरीके से मनाया जाने वाला त्यौहार है क्योंकि, मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा "मुहर्रम" को मातम (दुख भरा) के रूप में मनाया जाता है |


मोहर्रम मनाना जायज है या नहीं  | Good & Bad Things About Muharram
मोहर्रम मनाना जायज है या नहीं  | Good & Bad Things About Muharram 

मुहर्रम अरबी, उर्दू, फारसी, इस्लाम का वर्ष, यानी हजारी वर्ष का पहला महीना होता है, इसी साल से हजारी वर्ष का आरंभ होता है, इस महीने को इस्लाम के 4 पवित्र महीनों में विभक्त किया जाता है, हज़रत मोहम्मद ने (अल्लाह के रसूल माने जाने वाले) इस महीने को अल्लाह का महीना कहा है, इस महीने रोजा रखने वालों की एक खास अहमियत बताई जाती है |


मुहर्रम के महीने को 4 पवित्र महीने में रखा गया है, उन महीनों में 2 महीने मुहर्रम से पहले आते हैं, जिनका नाम है "जीकादा एवं जिलहिज्ज" | एक हदीस के अनुसार कहा गया है कि, अल्लाह के रसूल हज़रत मोहम्मद ने कहा की, रमज़ान के महीने में रखे हुए रोजे के अलावा सबसे अच्छे रोजे वह माने जाते हैं, जो अल्लाह के महीने में रखे जाते हैं, यानी मुहर्रम में रखे जाते हैं |


आज मैं आपको अपने आर्टिकल के द्वारा बताता हूं कि, मुहर्रम क्यों मनाते हैं ! और मुहर्रम मनाना जायज है या नहीं !


मुहर्रम क्यों मनाया जाता है :


आज से करीब 1400 साल पहले, इराक में यज़ीद नामक बादशाह राज करता था, यज़ीद बादशाह बहुत ही जालिम क्रूर स्वभाव और इंसानियत का दुश्मन था, उसके द्वारा जुल्मों से तंग आकर "हज़रत इमाम हुसैन" ने उस बेरहम जालिम बादशाह यज़ीद के विरुद्ध जंग का ऐलान कर दिया था, हज़रत इमाम हुसैन, मोहम्मद 

 ए मुस्तफ़ा के नवाजे थे |


हज़रत इमाम हुसैन ने बहुत ही डटकर जालिम बादशाह के आतंक का सामना किया था, लेकिन अंत में जालिम बादशाह ने हज़रत इमाम हुसैन के 6 महीने के मासूम बेटे असगर के साथ-साथ, 18 साल के अली अकबर और उनके भतीजे कासिम की 7 साल की उम्र में, 72 साथियों को एक साथ शहीद कर दिया था, और बाद में परिवार के साथ ही हज़रत इमाम हुसैन को भी करबला नामक स्थान पर शहीद कर दिया था |


जिस समय हज़रत इमाम हुसैन के साथ पूरे परिवार सहित, उनके साथियों को शहीद किया था, वह महीना मुहर्रम का था, और उस दिन 10 तारीख थी, जिसके कारण इस्लाम धर्म के लोगों ने इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, नया साल मनाना छोड़ दिया, इसी कारण बाद में आकर यह महीना, मातम और दुख के महीने में बदल गया, तभी से इस महीने में, मुहर्रम को शोक और दुख के साथ मनाए जाने लगा |



मुहर्रम मनाना जायज है या नहीं !



मुहर्रम मनाए जाना जायज है :


1.मुस्लिम समुदाय के लोगों में मुहर्रम एक मातम दुख के रूप में मनाया जाने वाला पल होता है, मुहर्रम पैगंबर मोहम्मद शाह के समय से, काफी समय पहले मनाए जाने का महत्व रखता है |


2. हज़रत इमाम हुसैन के साथ-साथ उनके पूरे परिवार और साथियों की कुर्बानी को याद करने के रूप में मनाया जाता है |


3. अल्लाह के फरिश्ते माने जाने वाले मोहम्मद पैगंबर (SWA) के अनुसार, रमज़ान के महीने के बाद, अल मुहर्रम का महीना, रोजा रखने के लिए अधिक फलदाई होता है | (अल्लाह के सच्चे बंदे के रूप में जाना जाता है) |


4. प्रत्येक इस्लामी महीने की अपनी पवित्रता होती है, रमज़ान के महीने की पवित्रता के बाद, मुहर्रम का महीना ही एक ऐसा महीना होता है जिसे, मुस्लिम समुदाय के लोग बहुत ही पवित्र मानते हैं |


5. हज़रत मोहम्मद के साथी "इब्ने अब्बास" के मुताबिक कहां गया था कि, जिसने मुहर्रम की 9 तारीख का रोजा रखा रखा हो, उसके 2 साल तक के गुनाह माफ हो जाते हैं, या 30 दिन के रोजे का (फल) उस 1 दिन के रखे रोजे के बराबर मिलता है |


मुहर्रम मनाना जायज नहीं ! :


1.आशूरा मुहर्रम का 10वां दिन होता है, मुहर्रम की सभी दिनों में सबसे पवित्र दिन होता है, पैगंबर साहब ने मदीना आकर इस दिन उपवास रखते हुए, मुसलमानों को भी उपवास रखने का निर्देश दिया था, लेकिन बाद में रमज़ान के महीने में उपवास रखना अनिवार्य कर दिया गया था, तो इसलिए मुहर्रम के दिन उपवास रखने को एक वैकल्पिक बना दिया गया था |


2. दुर्भाग्य से आज भी बहुत से मुसलमान यह मानते हैं, कि करबला की घटना के कारण मोहर्रम एक अशुभ महीना होता है, लेकिन "साहीह मुस्लिम" के अनुसार : 1163(ए) और तिमिरधि:438, यह अल्लाह का महीना माना जाता है, अल्लाह का महीना किसी भी प्रकार अपने लोगों के लिए आशुभ एवं बुरा नहीं हो सकता है |


3. इसी कारण बहुत से मुसलमान इस महीने निकाह नहीं करते है, जो की पूरी तरह गलत है |


4. मुहर्रम के दिन अधिकतर मुस्लिम समुदाय के लोग सड़कों पर निकल कर जुलूस के साथ, अपने आप को तलवार, खंजर, चाकू आदि के साथ घायल करते हैं, जो कि सामाजिक दृष्टि से गलत है |


5. मुहर्रम मातम मनाने के साथ-साथ धर्म की रक्षा करने वाले, हज़रत इमाम हुसैन की शहादत को याद करने वाला दिन होता है, न की सड़कों पर निकल कर शोर-शराबे के साथ जुलूस निकालने का दिन होता है |


Good & Bad Things About Muharram - निष्कर्ष :


उपरोक्त सभी पंक्तियों से यह निष्कर्ष निकलकर आता है कि, मुहर्रम का महीना हर एक मुसलमान के लिए एक पवित्र महीना होता है, मुहर्रम को मनाने के लिए प्रत्येक मुसलमान को बहुत ही शांति पूर्वक तरीके से, अपने अल्लाह के नेक बंदे हज़रत इमाम हुसैन की शहादत को याद रखते हुए मनाना चाहिए |


इस दिन किसी भी मुसलमान के द्वारा, अपने आप को घायल नहीं करना चाहिए, बल्कि हज़रत इमाम हुसैन के  नेक कार्यों को शांतिपूर्वक याद रखना चाहिए, और प्रार्थना करनी चाहिए, अल्लाह से की हमारे उस नेक बंदे हज़रत इमाम हुसैन की आत्मा को अल्लाह जन्नत में ख़ुशियाँ प्रदान करें |


मैं मुस्लिम समुदाय के त्योहार मुहर्रम के खिलाफ नहीं हूं, मैं तो सिर्फ यह बताना चाहता हूं कि, कोई भी समुदाय अपने त्यौहार को शांतिपूर्वक ढंग से मनाए, चाहे वह त्योहार दुख का हो, या ख़ुशियों भरा |





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