रक्षा बंधन और भाई दूज | History | Difference | Significance | Raksha Bandhan and Bhai dooj


नमस्कार दोस्तों,

आज मैं आपको, भाई-बहन के अटूट प्यार वाले दो त्योहार  के बारे में बता रहा हूं,  जिसका नाम है - 
Raksha Bandhan and  Bhai Dooj

History | Difference | Significance | Raksha Bandhan and Bhai dooj
History | Difference | Significance | Raksha Bandhan and Bhai dooj

रक्षाबंधन भाई बहनों के बीच प्यार को अटूट बंधनों में बांधने का त्यौहार होता है, रक्षाबंधन पर बहने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें मिठाई खिलाती हैं, और भाई अपनी बहन को जीवन भर रक्षा करने का वचन देता है |

भैया दूज का त्यौहार, भाई-बहनों के बीच प्यार बढ़ाने वाला तोहार होता है | जिसमें बहने अपने भाई के माथे पर, चंदन, रोली द्वारा टीका लगाकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं, और भाई भी अपनी बहनों को शुभ आशीर्वाद के साथ उपहार देते हैं |

सही अर्थ में देखा जाए तो - Raksha Bandhan and Bhai Dooj दोनों ही तोहार भाई-बहन के अटूट प्रेम को दर्शाता है, और जितना महत्व, रक्षाबंधन को दिया जाता है, उतना ही महत्व भैया दूज का भी होता है |

आज मैं आपको, अपने इस आर्टिकल के द्वारा, Raksha Bandhan and Bhai Dooj के त्योहारों के बीच के महत्व को बता रहा हूं कि -

Raksha Bandhan vs Bhai Dooj कब मनाया जाता है ?

 दोनों त्योहारों के पीछे का इतिहास क्या है ?
और दोनों त्योहारों के बीच अंतर क्या है ? एवं महत्व क्या है ?

1.Raksha Bandhan and  Bhai Dooj कब मनाया जाता है ?


Raksha Bandhan -

रक्षाबंधन के त्यौहार को हिंदू एवं जैन समुदाय के लोग बहुत ही हर्ष उल्लास एवं प्यार के साथ मनाते हैं | भारतवर्ष में रक्षाबंधन का त्यौहार प्रत्येक वर्ष में, श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन, भाई बहनों के बीच एक अटूट प्यार को, मजबूत बनाने के लिए मनाया जाता है | इस वर्ष 2020 में रक्षाबंधन 3 अगस्त को मनाया जाएगा |

Bhai Dooj -

भाई दूज भी रक्षाबंधन की तरह भाई-बहनों के बीच के प्यार को बढ़ाने के लिए मनाया जाता है |
भाई दूज प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की  द्वितीय तिथि (दिवाली के त्यौहार के तीसरे दिन ) हिंदू धर्म में मनाए जाने वाला पर्व है | इस वर्ष भैया दूज 2020 में 16 नवंबर को मनाया जाएगा |

2. Raksha Bandhan and  Bhai Dooj को मनाने का इतिहास :


Raksha Bandhan -

रक्षाबंधन मनाने का इतिहास बहुत पुराना है क्योंकि, रक्षाबंधन में एक बहन के द्वारा रक्षा सूत्र अपने भाई की कलाई में बांधा जाता है, और भाई भी उस रक्षा सूत्र धागे का मान रखने के लिए, बहन को पूरे जीवन भर रक्षा करने का विश्वास दिलाता है |

प्राचीन काल के इतिहास के अनुसार, रक्षाबंधन मनाने की अनेक कथाएं प्रचलित हैं | जिनमें से एक प्रमुख कथा मैं आपको बता रहा हूं -

प्राचीन काल में सिकंदर नाम का एक शासक, पूरे विश्व में अपना वर्चस्व जमाते हुए, भारत आ पहुंचा था | भारत में उसका सामना भारतीय राजा पुरू से हुआ, भारत का राजा पुरू बहुत ही शक्तिशाली एवं बलशाली राजा था |

भारतीय राजा ने युद्ध में, सिकंदर को धूल चटा दी, उस समय सिकंदर की रानी को, भारत के त्यौहार रक्षाबंधन के बारे में पता चला, रानी ने अपने पति सिकंदर की जान, भारतीय राजा पुरु से बचाने के लिए, एक राखी भारत के राजा को भेजी, पुरु को राखी देखकर बहुत आश्चर्य हुआ, लेकिन राखी का सम्मान रखते हुए राजा पुरु ने, युद्ध के दौरान सिकंदर का वध न करके, उसको बंदी बना लिया और दूसरी तरफ राजा पुरु के हाथों में, अपनी रानी के द्वारा, भेजी गई राखी को  देख सिकंदर ने, भी अपना बड़ा दिल करके, राजा पुरु का राज्य वापस कर दिया, ऐसी ही अनेकों कई प्रकार की कथाएं, रक्षाबंधन के त्यौहार के महत्व को बताती है की, किस प्रकार एक बहन द्वारा, अपने भाई की कलाई पर राखी बांधे जाने से, भाई भी अपनी बहन को शुभकामनाओं के साथ, उसके जीवन में आने वाली किसी भी परेशानी में रक्षा करने का वचनबद्ध रहता है |

Bhai Dooj -

रक्षाबंधन की तरह भाई दूज का भी इतिहास बहुत पुराना है | कार्तिक माह की द्वितीय तिथि, भाई बहन के लिए बहुत ही सौभाग्य लेकर आती है | इस दिन बहने अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती है, और भाई भी उन्हें जीवन भर खुश एवं सुखी जीवन व्यतीत करने का आशीर्वाद के साथ, उपहार भी देते हैं |

प्राचीन काल की कुछ कथाओं में से एक प्रमुख कथा मैं आपको बता रहा हूं -

यह कथा मुख्य रूप से सूर्य देव और छाया के पुत्र एवं पुत्री यमराज तथा यमुना पर आधारित है | यमुना हमेशा अपने भाई यमराज से निवेदन किया करती थी कि, वह उसके घर पर आकर भोजन ग्रहण करें, परंतु यमराज अपने कार्यों में इतने व्यस्त रहते थे कि, उनको यमुना के घर आने का समय नहीं मिल पाता था | लेकिन एक दिन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को, यमुना के घर यमराज अचानक पधार गए, यह देखकर यमुना अत्यंत खुश हुई, और उसने प्रसन्न होकर अपने भाई का बहुत धूमधाम से स्वागत किया, और स्वादिष्ट पकवानों के साथ भोजन कराया |

यमुना के प्रेम पूर्वक व्यवहार को देखकर यमराज जी ने यमुना से कहा, मैं तुम्हारी इस प्रेम भरे व्यवहार से बहुत खुश हूं, इसलिए तुम मुझसे कुछ भी वर मांग सकती हो | तब बहन यमुना ने अपने भाई यमराज से कहा कि, आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे यहां भोजन करने आया करें, तथा इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका करके भोजन खिलाएं, उसे कभी भी किसी प्रकार का भय ना रहे | यमराज जी ने प्रसन्न होकर अपनी बहन को तथास्तु कहते हुए, अपने यमलोक को चले गए | तभी से माना जाता है कि, इस दिन जो भाई अपनी बहन के निमंत्रण को स्वीकार करता है, और प्रेम पूर्वक माथे पर तिलक करवा कर भोजन करता है तो, उसे और उसकी बहन को कभी भी किसी बात का डर नहीं होता |

इसी कथा के अनुसार, भैया दूज को भाई अपनी बहन के द्वारा दिए गए निमंत्रण पर, उसके घर जाता है, और बहन भी उसको प्रेम पूर्वक टीका करके भोजन कराती है, और भाई भी उसे शुभकामनाओं के साथ आशीर्वाद देता है |

3. Raksha Bandhan and Bhai Dooj के बीच क्या अंतर होता है ?


आम तौर पर देखा जाए तो, Raksha Bandhan and Bhai Dooj  में कोई ज्यादा अंतर नहीं होता है क्योंकि, दोनों ही तोहार  भाई बहनों के बीच अटूट प्यार को दर्शाता है | लेकिन इसके बावजूद दोनों त्योहारों को अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है, और भाई-बहनों के बीच के प्यार को आजीवन मजबूत बनाया जाता है |

Raksha Bandhan -

रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है | रक्षाबंधन भाई बहनों के बीच में मनाए जाने वाला त्यौहार ही नहीं होता है बल्कि, एक ऐसी अटूट भावना होती है जो, एक कच्चे धागे की रेशम की डोरी के जरिए, दोनों के प्यार भरे मोतियों को सजाकर, मजबूत बनाती है | रक्षाबंधन हिंदू धर्म के त्योहारों में से एक सबसे लोकप्रिय त्यौहार होता है | यह त्योहार भाई बहनों के बीच समर्पण, त्याग और प्यार को दर्शाता है |

रक्षाबंधन के दिन सभी बहनें, अपने भाइयों की कलाई में रक्षा सूत्र बांधकर, मिठाई खिलाती है, उनकी लंबी उम्र की मंगल कामना करती हैं | और दूसरी तरफ भाई भी अपनी बहन को उसके जीवन में आने वाली, किसी भी परेशानी एवं विपत्तियों से निपटने के लिए, हर कदम पर साथ देने एवं रक्षा करने का वचन देता है | रक्षाबंधन के त्यौहार को हिंदू धर्म के अलावा, सभी धर्मों के लोगों के साथ, जैन धर्म के लोगों के द्वारा, भी बहुत ही उत्साह पूर्वक मनाया जाता हैं |

रक्षाबंधन के दिन केवल बहने ही अपने भाइयों को राखी नहीं बांधी बल्कि, घर में कोई छोटी लड़की भी, अपने पिता एवं गुरुजनों को भी बहुत सम्मान के साथ, रक्षा सूत्र उनकी कलाई में बांधती है | और अधिकतर देखा गया है कि, कहीं-कहीं पर बहने बॉर्डर पर तैनात सिपाहियों को भी, बहुत ही श्रद्धा भाव से, रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती है |

Bhai Dooj -

भाई दूज शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाए जाने वाला त्यौहार होता है जो कि, भारत के कई राज्यों में मनाया जाता है | इस दिन बहनें अपने भाई को अपने घर आने का निमंत्रण देती है, और भाई भी उनके निमंत्रण को स्वीकार करके अपनी बहनों के घर जाते हैं | बहने उनका स्वागत करने के लिए, सबसे पहले उनके माथे पर तिलक करती हैं, अपने भाई की लंबी उम्र की दुआएं मांगती हैं, और भाई भी अपनी बहनों को उपहार के रूप में, बहनों की मनपसंद वस्तुएं, बहुत ही प्यार से, उनको भेंट करते हैं |

उपरोक्त कथा के अनुसार, आपको यह ज्ञात है कि, बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक करती हैं लेकिन, क्या आपको यह मालूम है कि, भैया दूज को न केवल भाई को सम्मान दिया जाता है बल्कि, इस पवित्र भैया दूज के त्यौहार के दिन, बहने अपने घर में रह रहे सदस्य, जैसे - भतीजे, भाभियों से भी लगाव रखती हैं, इसलिए आज के दिन प्रत्येक बहने अपने भाई के साथ - साथ अपने भतीजे एवं भाभी को भी माथे पर टीका करके, उनको मिठाई एवं सूखा नारियल भेंट करती हैं | बहने अगर चाहे तो, अपने घर में रह रहे सबसे छोटे सदस्य के माथे पर भी तिलक कर सकती हैं या भाई के मित्रों को भी, भाई दूज वाले दिन तिलक लगाकर उनका सम्मान कर सकती है | भाई दूज वाले दिन ऐसा करने से परिवार के सभी सदस्यों के बीच, आपस में एक मजबूत प्यार भरे रिश्ते की नीव रखी जाती है |

4. Raksha Bandhan and Bhai Dooj का महत्व क्या है ?


Raksha Bandhan -

जैसे कि नाम से साबित होता है कि, रक्षाबंधन यानी "रक्षा का सूत्र" | रक्षा सूत्र एक ऐसा पवित्र बंधन है, जिसको बहन अपने भाई की कलाई पर, रेशम या सूत के धागे की डोरी के रूप में बांधती है, जिससे उसके भाई के ऊपर जीवन में किसी प्रकार की बाधाओं से, निपटने की ताकत मिल सके, और भाई भी अपनी बहन के जीवन में, किसी भी प्रकार की मुसीबतों से निपटने के लिए, जीवन भर उसकी रक्षा कर सके, जैसे - द्रोपदी ने श्री कृष्ण की उंगली घायल देखकर, उनकी उंगली में अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर बांध दिया था, और श्रीकृष्ण ने भी अपनी उंगली पर बंधे साड़ी के पल्लू का मोल चुकाने के लिए, भरी सभा में उसकी रक्षा करके चुकाया था |

इसीलिए रक्षाबंधन का महत्व प्रत्येक भाई-बहन के लिए आपस में एक मजबूत प्यार भरी डोर से बंधा हुआ है | इसलिए बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर, अपने बीच के रिश्ते को मजबूत बनाती है, और भाई भी उसे जीवन भर रक्षा करने का वचन देता है |

Bhai Dooj -

भाई दूज का भी महत्व, रक्षाबंधन की तरह भाई बहनों के बीच आपसी प्यार को मजबूत बनाता है | भाई दूज के दिन बहनों द्वारा, आमंत्रण पर, भाई बहन के घर भोजन करने की परंपरा को निभाते हैं | ऋग्वेद के अनुसार, यमुना ने अपने भाई यमराज को अपने घर बुलाया था, और भोजन कराया था, इसीलिए इस दिन को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है |

वेद पुराण के अनुसार इस दिन, जो भाई अपनी बहन के घर भोजन करता है, वह कभी भी, पूरे साल किसी भी, लड़ाई-झगड़े में नहीं पड़ता है, और उसे किसी भी बात का भय नहीं होता है | अर्थात भाइयों को हर एक संकट से निपटने की ताकत मिलती है | अगर किसी भाई की कोई बहन नहीं है तो, वह अपने रिश्तेदारों, जैसे - मामा चाचा, ताई, बुआ आदि के घर जाकर, उनको बहन मानकर, भैया दूज के दिन घर जाकर भाई दूज मना सकता है | अगर किसी भाई की  बहन विवाहित है तो, वह उसके घर पर जाकर भोजन कर सकता है, जिससे उसके सभी कष्टों का नाश होता है, और जीवन हमेशा खुशहाल बना रहता है |

Raksha Bandhan and Bhai Dooj - निष्कर्ष :


उपरोक्त सभी तथ्यों से यह निष्कर्ष निकलकर आता है कि, रक्षाबंधन और भाई दूज दोनों ही त्यौहार, परस्पर भाई-बहनों के बीच मनाए जाने वाला, प्यार भरा त्यौहार है | दोनों ही तोहार को प्रत्येक भाई बहन बहुत ही उत्साह एवं शुभकामनाओं के साथ मनाते हैं | बहन द्वारा, अपने भाइयों के लिए लंबी आयु की कामना के साथ साथ, भाई के ऊपर किसी भी प्रकार की विपत्ति न पड़े, इस बात की वह सच्चे मन से कामना करती है | और भाई भी अपनी बहनों को जीवन भर रक्षा करने का वचन देते हैं,और अनेकों प्रकार के बहनों के मनपसंद उपहार प्रेम पूर्वक उनको देते हैं |

रक्षाबंधन और भैया दूज ही एक ऐसे तोहार होते हैं जो, किसी धर्म जाति को ना देखते हुए भी, बहुत ही प्रेम पूर्वक आपस में मनाते हैं, और एक दूसरे को मंगल कामनाओं के साथ आशीर्वाद देते हैं |













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